EL7.AI पर प्रदान की गई जानकारी केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और यह वित्तीय सलाह नहीं है।
अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर कानूनी अनिश्चितता के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया नए सिरे से अस्थिरता और गिरावट के दबाव का सामना कर रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद जिसमें शुरू में पारस्परिक टैरिफ को रद्द कर दिया गया था, राष्ट्रपति ट्रम्प ने वैकल्पिक कानूनी ढाँचों का उपयोग करके उन्हें तुरंत फिर से लागू कर दिया। इन घटनाक्रमों के जवाब में, अमेरिका और भारत ने व्यापक प्रभावों का आकलन करने के लिए इस सप्ताह निर्धारित द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को टाल दिया है। इस भू-राजनीतिक घर्षण ने डॉलर की ताकत को मजबूत किया है, जिससे INR जैसी उभरती बाजार मुद्राओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। बाजार विश्लेषकों का संकेत है कि भारतीय रुपया एक संरचनात्मक मंदी के रुझान में बना हुआ है, जिसमें USD/INR जोड़ी 93.0 के स्तर को लक्षित कर रही है। व्यापार वार्ताओं का स्थगन और ट्रम्प का अप्रत्याशित व्यापारिक रुख वैश्विक निवेशकों के लिए 'रिस्क-ऑफ' माहौल बनाना जारी रखे हुए हैं।
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